पंजाबी फिल्मों का चमकता सितारा , अदभुत अभिनय क्षमता का धनी विराट महाल

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पंजाब शरू से ही संगीत और साहित्य से सम्पन्न रहा है। यहां की लोक संस्कृति और सभ्यता की पहचान यहां के किस्सेकहानियों से लेकर लोकगीतों से सहज हो जाती है। यहां की मिटटी ने एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध कविशायर ,प्रेम करनेवाले प्रेमी युगलों के साथसाथ अभिनय करनेवाले नायक और कलाकार भी पैदा किये हैं जिन्होंने भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पंजाब की संस्कृति और लोकसंगीत का डंका बजाया और जो आज भी कायम है। जहां पंजाबी मेहनतकश और जिन्दादिल कौम तो है ही वहीं युद्धकौशल में भी अपना लोहा मनवाने में सबसे ऊपर रही है। इस जिंदादिली के साथसाथ पंजाबियों ने संगीत और अभिनय के क्षेत्र में भी अपना परचम हमेशा से पूरी दुनिया में फहराया है। पंजाबी संगीत की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि पुराने जमाने से लेकर आज तक की भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सफर में जहां पंजाबियों का अधिपत्य जमा हुआ है वहीं हर हिंदी फ़िल्में में भी पंजाबी गीतसंगीत का तड़का लगाना सफलता का पैमाना माना जाता है। पंजाबी गीत और धुन के बिना फिल्म नीरस सी लगती है। यह पंजाबियों की संगीत के क्षेत्र में सम्पन्न विरासत का ही परिणाम है कि पंजाबी भाषा समझनेवाले लोग भी पंजाबी गीतों और धुनों पर मस्त होकर थिरकने को विवश हो जाते हैं।

भारत में ब से चलचित्र का अविष्कार हुआ है और फिल्में बननी  शुरू हुई हैं और कुछ समय बाद ही पंजाबी फिल्मों निर्माण भी शरू हो गया । अब तक के फ़िल्मी इतिहास में कई नामी कलाकार ऐसे हुए जो पंजाबी अभिनय से हिंदी फिल्मों में आकर दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए हैं। पिछले कुछ समय से एक बार फिर पंजाबी फिल्मों का दौर शुरू हो गया है जिनमें पंजाबी कलाकारों ने अपनी दमदार अभिनय क्षमता से दर्शकों  के बीच अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज़ करवाई है।सजग वार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटीया ने पिछले दिनों पंजाबी थियेटर के दमदार अभिनेता श्री विराट महाल से विस्तृत बातचीत की। यहां उसी बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं ; 

 छःफूटा ऊचालम्बा सुन्दर चेहरेमोहरे वाला पंजाबी गभरु विराट महाल भी  पंजाबी फिल्मों में उभरता सितारा साबित हो रहा है जिसने अपनी अभिनय क्षमता से अल्पकाल में ही लोकप्रियता के क्षेत्र अपनी खास पहचान बना ली है। पंजाब के भटिण्डा जिले के रहनेवाले विराट को भगवान ने आकर्षक चेहरा और व्यक्तित्व के साथ अदभूत अभिनय क्षमता भी प्रदान की है। पिछले 14 वर्षों के थियेटर में काम करने के अनुभव ने उनकी फिल्मों की राह भी आसान सी बना दी है। विराट को 2011 -2012 में उनकी उतकर्ष अभिनय क्षमता के लिए पटियाला यूनिवर्सिटी ने गोल्ड मेडल  से सम्मानित किया। पंजाब के ग्रामीण अंचल में जन्म लेनेवाले महाल ने पटियाला युनिवेर्सिटी से बी किया और थियेटर के साथ जुड गए। विराट कहते हैं कि उनका बचपन से यही सपना था कि वो अभिनय के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाएंगे और उहोने अपने सपने को साकार करने के लिए पूरी लग्न और मेहनत करनी शुरू कर दी। उसी लग्न और मेहनत के दम पर आज वो एक स्थापित  कलाकार बन चुके हैं। विराट ने अधिकांश फीचर फिल्मों में खलनायक की सशक्त भूमिका अदा की है। अभिनय के साथसाथ पंजाब युनिवेर्सिटी से पंजाबी में एम् विराट को कहानी लिखने में माहिर हैं। उनकी द्वारा लिखी कहानियों पर फीचर फिल्म बन चुकी हैं जो दर्शकों को काफी पसंद आई हैं। अमरो फिल्म की कहानी का लेखन विराट ने ही किया है। विराट कहते हैं कि अब तक विराट कहते हैं कि उन्होंने अब तक जितनी फीचर फिल्मों में भी काम किया है उनमें सब में से उनको उनकी निकट भविष्य में रिलीज होनेवाली फिल्म  कच्ची पहि दा गीत  फिल्म में उनकी मास्टर जगरूप की भूमिका सबसे अधिक मन को भायी है। यह फिल्म बूटा सिंह शाद जी  की लिखी कहानी पर कान फिल्म फेस्टिवल  में प्रदर्शित करने हेतु श्री सुखवीर सिंह जी के कुशल निर्देशन में बनाई जा रही है। और इसमें प्रसिद्ध पंजाबी कलाकार निर्मल ऋषि और नगिंदर गखड़ जी  मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।   विराट अभी तक कई फीचर फिल्मों में अभिनय के अलावा दूरदर्शन के लिए निर्मित टेली फिल्मों सहित टी वी के विज्ञापनौ में भी अपना महत्वपूर्ण रोल निभा चुके हैं। विराट देखने में जितने सुन्दर और आकर्षक हैं बात करने में भी उनकी वाणी उतनी ही मधुर और सौम्य है। उनकी फिल्मों में प्रमुख नाम हैंअँखियाँ उडीक दियां ,बेस्ट फ्रेंड ,किन्ना करदे हाँ प्यार ,तवीत ,लाजो ,फौजी केहर सिंह। विराट ने बताया कि स्कूल टाइम में वो कबड्डी के खिलाडी थे और खाली समय में बच्चों का समूह बनाकर नाटक खेला करते थे। 

    विराट चाटुकारिता की बजाय अपनी मेहनत और काम के प्रति सच्ची निष्ठां को ही सफलता की कुंजी मानते हैं। वो कहते हैं कि व्यक्ति अगर ठान ले तो वो अपनी मेहनत के बल पर किसी भी मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक दुर्घटना में उनकी एक टाँग टूट गयी थी और दूसरी बुरी तरह से जख्मी हो गयी थी लेकिन इस समय में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी प्रबल ईच्छा के बलबूते स्वस्थ होकर फिर अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। फिल्म अँखियाँ उडीक दियां  में मुख्य भूमिका लखविंदर वडाली ने निभाई थी जिसमें विराट ने उनके मित्र के रूप में में चरित भूमिका अदा की थी और इसके निर्देशक मुकेश गौतम थे।                                                      विराट कहते हैं कि उनको  फिल्म में खलनायक या किसी रौबिले  अर्थात दबंग चरित्र पात्र के रोल को करने में ज्यादा मजा आता है। वो कहते हैं कि उनको आर्ट मूवीज ज्यादा अच्छी लगती हैं और उनकी पसंदीदा अदाकारा शबाना आज़मी और तब्बू हैं और मनोज वाजपेयी का अभिनय उनको अच्छा लगता है। उनकी यह हार्दिक इच्छा भी है कि वो इन दोनों यानि शबाना और तब्बू के साथ किसी फिल्म में काम करें। 

बातचीत के अंत में विराट ने भी अपनी दिली इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वो मुंबई जाकर हिंदी फिल्मों में काम करना चाहते हैं और इस बात की उन्हें पूरी उम्मीद ही नहीं विश्वास भी है की उनकी यह ईच्छा शीघ्र पूर्ण होगी। विराट हिन्दी के ऐसे धारावाहिक में भी काम करने के इच्छुक हैं जो राजामहाराजा की कहानियों पर आधारित हों और उनका रोल राजसी वेशभूषा वाला हो जो उनको बेहद पसंद है। वो आज के युवाओं को एक बात कहना नहीं भूलते कि उनको अपना लक्ष्य निर्धारित करने के उपरांत पूरी मेहनत और निष्ठा से उसको पाने के लिए संघर्ष करना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय कड़ी पर्तिस्पर्धा का जमाना है जिसमें जुगाड़ या
चाटुकारिता के दम पर नहीं अपनी कौशलता और योग्यता से ही अपने लक्ष्य को पाया और उसपर टिका रहा जा सकता है। वो कहते हैं कि आज पंजाब की मूल संस्कृति को आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति निगलती जा रही है जो चिंता का विषय है। विराट यह भी कहते हैं कि शहरों की तुलना में पंजाब के ग्रामीण परिवेश में अभी भी पुराणी संस्कृति और सभ्याचार देखने को मिल जाती है जो कि संतोष की बात है।

 

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