दुशमनों के साथ सीमा पर तो सेना लड़ेगी पर देश के अंदर आर्थिक मोर्चे पर हमें लड़ना होगा।

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दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/इस समय हमारा देश बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। हमें एक ओर जहां कोरोना जैसी महामारी से जूझना पड़ रहा है ,वहीं दूसरी ओर देश के दुश्मन चीन और पाकिस्तान हमारी सीमाओं पर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हैं।

 देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए और चीनी सैनिकों के धोखेबाजी का मुकाबला करते हुए हमारे देश के 20 जवान शहीद हो गए हैं ।हमारे जवानों ने बड़ी वीरता से दुशमनों का मुकाबला किया और काफ़ी संख्या में उनको भी मारा डाला।हमारे समस्त देशवासियों का भी यह कर्तव्य है कि हम भी इस घड़ी में देश के स्वाभिमान और इसकी एकता- अखंडता को सुरक्षित रखने हेतु चीन को मुंह तोड़ जवाब दे। सीमा पर तो दुश्मन से हमारी सेना निपट ही लेगी ,लेकिन हमें देश के अंदर चीन को आर्थिक मोर्चे पर कमजोर करना होगा। चीन हमारे देश में बड़ी मात्रा में अपना सामान बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करके उस पैसे को हमारे विरूद्ध सीमा पर कर रहा है।अत हमें अभी से यह संकल्प ले लेना चाहिए कि हम चीन की बनी वस्तुओं का बहिष्कार शुरू कर दें। हम चीन को आर्थिक रूप से कमजोर करके उसके नापाक मंसूबों को तहस- नहस कर सकते हैं।चीन इलेल्ट्रोनिक और आई टी क्षेत्र में भी बहुत बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है। बहुत से सॉफ्ट और हार्ड वेयर/ फोन एप आदि का भी हम अपने फोन में प्रयोग करके चीन को मजबूत बना रहे हैं। हमें इन फोन एप आदि को अपने मोबाईल से बाहर कर देना चाहिए। आजकल बहुत से लोग टिक टोक (जो कि चीन का ही एप है)बहुत इस्तेमाल करके खुद की अदृश्य कला को प्रदर्शित करने में दिन -रात लगे हुए हैं ,हम उसको भी तुरन्त बन्द करें। सभी देशवासी भी चीनी एप से बनी किसी वीडियो आदि को बनाना बंद कर दें।अगर कोई अब भी चीनी एप को अपनाता है  तो वह अपने देश को नुकसान पहुंचाने का ही काम करता है। सभी नागरिकों को भी हमें इस बात को लेकर जागरूक रहना होगा कि कौन सी वीडियो चीनी एप से बनाकर हमारे को मैसेज से भेजी जा रही है,हम तुरन्त इसको निरस्त करें और भेजनेवाले को भी ऐसा न करने को कहें। जो नागरिक इस आग्रह के बावजूद भी चीनी प्रेम दिखाता है तो वह देश से द्रोह ही करता है,क्योंकि जो अपने देश का नहीं हो सकता वो किसी का नहीं हो सकता। हम मानते हैं कि बहुत लोग बड़ी मात्रा में चीनी वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन पर निर्भर हो चुके हैं, लेकिन हमें अब आत्मनिर्भर होना होगा। हम अभी आत्मनिर्भर होने का संकल्प करके धीरे -धीरे चीनी अर्थव्यवस्था को समाप्त कर सकते हैं। देश और हमारी रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत मां के वीर सपूतों का ऋण हम कभी नहीं उतार सकते हैं,लेकिन उनके चरणों में अपना नमन करके, उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि तो अर्पित कर ही सकते हैं। जय हिन्द। जय भवानी। भारत माता की जय।

 

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