हमें शांति का पाठ पढ़ाने वालों ने यह नहीं बताया कि यह स्थापित कैसे होती है?क्या सिर्फ चमत्कारों के भरोसे बच पाएगा हमारा अस्तित्व?

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हमें पिछली कई सदियों से जो धार्मिक शिक्षा दी जा रही है, उस पर चलकर हम कहां से कहां गए हैं? आज इस पर भी थोड़ा सा विचार करना आवशयक हो गया है। क्यों हम शांति का जाप करतेआतंक और आतंकियों से घिर गए? हमें यही पढाया जा रहा कुटुंबकम् क्या पूरा विश्व एक परिवार बन पाया ? इसका उत्तर है नहीं। हम विश्व को एक परिवार बनाते बनाते खुद अपने परिवारों को खत्म करते जा रहे हैं।

 * धर्म की जय हो। क्या हुई धर्म की जय? नहीं, बल्कि पिछले एक हजार साल से तो अधर्म की ही जय हो रही है। यह नारा लगाते- लगाते अधर्मियों के हाथों करोड़ों सनातनी /हिंदू मारे गए और करोड़ों का जबरन धर्म ही बदल दिया गया। भूतकाल में जबरन परिवर्तित हुए कायर और नपुंसक हिन्दुओं की संताने आज जेहादी बने हमारे धर्म को चुनौति दे रहे हैं। *विश्व का कल्याण हो। क्या हुआ इसका? तो उत्तर साफ है विश्व का तो पता नहीं भारत का तो बुरा हाल ही हुआ। एक हजार से ज्यादा वर्षों तक मुस्लिमों और बाद में गोरों का गुलाम हो गया। विश्व के कल्याण की कामना करने वाले खुद ही दुर्दशा को प्राप्त हो गए।

 

 

* प्राणियों में सद्भावना हो। हुई क्या प्राणियों में सद्भावना। जीव -जंतुओं से लेकर इंसानों तक एक दूसरे के दुश्मन हैं। किसी भी प्राणी ने किसी पर रहम नहीं किया और तो और यह नारा लगाने वालों पर ही दूसरे आत्ताईयों ने इतने अत्याचार किए कि जिससे इंसानियत भी लज्जित हो गई। इसका वर्णन इतिहास में ही मिल जाता है।

* अधर्म का नाश हो। क्या हुआ अधर्म का नाश? नहीं हुआ, बल्कि अधर्मियों ने धर्म और उसके अनुयाईयों का नाश कर दिया और आज भारत ही क्या पूरी दुनिया में इन्हीं की संख्या दिन -रात बढ़ रही है।

* भारत माता की जय। क्या हुआ? यह कहते -कहते भारत माता के टुकड़े और करवा दिए गए और जय कहने वाले इसको रोक भी नहीं पाए। बची हुई शेष भारत माता के टुकड़े- टुकड़े करने वाले गैंग जगह – सिर उठाए सरे- आम अपनी साजिशों को अंजाम दे रहे हैं और हम सिर्फ जय बोलकर खुश हैं।

* गऊ माता की जय। क्या गऊ माता का हाल? इसके पुत्रों ने तो मां को संभाला नहीं और वह सड़कों पर कूड़ा करकट खाने को मजबूर हो गई। साथ ही दूसरे जल्लादों ने इसको खाने के लिए कत्ल करके  इसके पुत्रों को यह दर्शा दिया कि सिर्फ नारों से तुम्हारी माता की जय नहीं होगी।

* गंगा माता की जय भी बोली जाती है। इस पवित्र नदी का जो हाल किया गया वह भी हम से नहीं छिपा है। करोड़ों -अरबों की धन राशि गंगा सफाई के नाम पर लोग डकार गए परन्तु गंगा साफ नहीं हो पाई।

* सदियों से हम शांति पाठ करते आ रहे हैं ,लेकिन इसकी स्थापना के चक्कर में करोड़ों लोगों का नरसंहार कई बार हुआ। नारी जाति की अस्मत को बार- बार, तार -तार कर दिया गया। यह शांति की रट हम आज भी लगाए हुए हैं, परंतु अभी तक यह स्थापित नहीं हुई। शांति कभी अहिंसा की राह पर चलने से स्थापित नहीं होती है,यह बात हमारे पूर्वजों ने हमें त्रेता और द्वापर युग में अपने द्वारा किए गए सशस्त्र संघर्षों से समझा दिया था, पर हम उनकी इस बात को आज तक नहीं समझे।

* भारत के संतों की जय हो। तो इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के पालघर की घटना है कि किस तरह से संतों को पुलिस के सामने जेहादी भीड़ ने पीट -पीट कर मौत के घाट उतार दिया। जो लोग संतों की रक्षा नहीं कर सकते उन्हें उनकी जय बोलने का अधिकार है क्या?

       हम सिर्फ नारे लगाते आए हैं और नारे लगाते रहेंगे ,क्योंकि हमारे धर्माचार्यों ने हमें यही सिखाया है और समझाया है। हम क्या करें लड़ना हमने सीखा नहीं और चमत्कारों पर हमें भरोसा है। जैसे त्रेता युग में श्रीराम ने अवतार लेकर राक्षसों का नरसंहार किया और द्वापर में श्रीकृष्ण ने अवतरित होकर अधर्मी और अन्यायी शक्तियों का सर्वनाश किया, इसी तरह से फिर कलयुग में भी कोई ईश्वरीय शक्ति अवतार लेकर हमें बचाने आएगी। यही हमारा विश्वास है और इसी के भरोसे हम बैठे हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई अवतार आपको बचा पाएगा ,क्योंकि हमने अब तक अवतारों की बात कब मानी है? हमने तो उनकी मूर्तियां बनाकर उन्हें मंदिरों में बैठा दिया और उनकी पूजा करने में ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। हमारे अवतारों ने क्या अपने जीवन काल में सिर्फ पूजा ही की या अन्याय और अधर्म के विरूद्ध शस्त्र भी उठाए? इस बात को हमारे धर्माचार्यों ने हमें क्यों नहीं समझाया कि जब हमारे अवतारों ने अन्याय और आतंक का डटकर सामना किया और उनका अंत किया तो तुम भी इसी राह को पकड़ो? इसी राह पर चलकर विश्व का कल्याण होगा, प्राणियों में सद्भावना होगी, धर्म की जय होगी, अधर्म का नाश होगा, भारत माता की जय होगी, गऊ माता की जय होगी, गंगा माता की जय होगी और पूरा विश्व एक परिवार बनेगा।( वॉयस ऑफ भारत)

 

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