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दिल्ली बार कौंसिल के नवनिर्वाचित चेयरमैन श्री राकेश सेहरावत का किया गया हार्दिक अभिनंदन।                     हिन्दु मुसलमानों से अगर कुछ सीख लेते,तो उनको दुर्दिन न देखने पड़ते। -अश्विनी भाटिया                     आर एस चौधरी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा जरूरतमंद लोगों को फ्री राशन और राखी का वितरण।                     देश विभाजन और लाखों लोगों की हत्या के जिम्मेदार गांधी-नेहरू और जिन्ना को हम कभी माफ नहीं करेंगे। -अश्विनी भाटिया आज 15 अगस्त है।आज से 74 वर्ष पूर्व जहां भारत को अंग्रेजी साम्राज्य से मुक्ति मिली,वहीं भारत को विभाजन का दर्द भी मिला।                      ममता ने सभी संवैधानिक मर्यादाओं को किया तार -तार।बंगाल की हिंसा को सरकार का संरक्षण।- विजयवर्गीय                     
 
बॉलीवुड

05/12/2017 पंजाबी फिल्मों का चमकता सितारा , अदभुत अभिनय क्षमता का धनी विराट महाल
पंजाब शरू से ही संगीत और साहित्य से सम्पन्न रहा है। यहां की लोक संस्कृति और सभ्यता की पहचान यहां के किस्से -कहानियों से लेकर लोकगीतों से सहज हो जाती है। यहां की मिटटी ने एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध कवि -शायर ,प्रेम करनेवाले प्रेमी युगलों के साथ -साथ अभिनय करनेवाले नायक और कलाकार भी पैदा किये हैं जिन्होंने भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पंजाब की संस्कृति और लोकसंगीत का डंका बजाया और जो आज भी कायम है। जहां पंजाबी मेहनतकश और जिन्दादिल कौम तो है ही वहीं युद्धकौशल में भी अपना लोहा मनवाने में सबसे ऊपर रही है। इस जिंदादिली के साथ -साथ पंजाबियों ने संगीत और अभिनय के क्षेत्र में भी अपना परचम हमेशा से पूरी दुनिया में फहराया है। पंजाबी संगीत की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि पुराने जमाने से लेकर आज तक की भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सफर में जहां पंजाबियों का अधिपत्य जमा हुआ है वहीं हर हिंदी फ़िल्में में भी पंजाबी गीत -संगीत का तड़का लगाना सफलता का पैमाना माना जाता है। पंजाबी गीत और धुन के बिना फिल्म नीरस सी लगती है। यह पंजाबियों की संगीत के क्षेत्र में सम्पन्न विरासत का ही परिणाम है कि पंजाबी भाषा न समझनेवाले लोग भी पंजाबी गीतों और धुनों पर मस्त होकर थिरकने को विवश हो जाते हैं।


05/12/2017 मॉडलिंग से शरुवात करके बॉलीवुड में अहम उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं राहुल चौधरी।
आज कैरियर को बनाने और रोजी -रोटी कमाने की अंधी होड़ ने बहुत सारी प्रतिभाओं को समाप्त कर दिया है। बहुत से लोग अपने अंदर मौजूद विलक्षण प्रतिभा का गला घोंटकर अनिच्छा से जीवन जीने को मजबूर हैं। आपको आज बहुत कम ऐसे युवा मिलेंगे जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी न तो अपने अंदर के कलाकार को मरने दिया और न ही अपनी दिली इच्छा को दबने दिया। अपने मन में खुद को लेकर बचपन से ही देखे हसीन सपने को साकार करने का जोखिमपूर्ण कदम उठाने वाले बहुत कम लोग ही हैं।ऐसे ही लोगों में से एक नाम राहुल चौधरी का भी है जिन्होंने अपने बचपन में खुद को अभिनेता बनाने के सपने को साकार करने हेतु सरकारी सेवा को भी तिलांजलि दे डाली।




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